कृषि बिल 2020?

क्या है कृषि बिल 2020? जानिए क्यों कर रहे हैं किसान इसका विरोध?

केंद्र सरकार 5 जून 2020 को संसद मैं किसानों को लेकर तीन बिल पास किए। जिनके विरोध स्वरूप 17 सितंबर केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और कृषि बिल को किसान विरोधी बताया। देश के किसान इसके विरोध में उतर गए हरियाणा ,पंजाब, बेंगलुरु
और कई जगह आंदोलन की शुरुआत हो गई विपक्ष भी लगातार इसका विरोध करने लगे। राहुल गांधी ने भी इस को काला कानून, बताते हुए कोर्ट में जाने की बात की ।
राष्ट्रपति रामनाथ गोविंद 27 सितम्बर 2020 संसद में पारित तीनों कृषि बिलो को हस्ताक्षर करके स्वीकृति दे दी। और अब भी विरोध जारी है।
26 जनवरी 2021 को विरोध कर्मियों ने लाल किले पर हंगामा करा इसमें कई पुलिसकर्मी और आंदोलनकारी घायल हुए।

तो आइए बात करते क्या है यहां
3 कृषि बिल /कानून?

1 पहला बिल : The farmer produce trade and commerce( promotion and facilation ordinance 2020)
यहां बिल कहता है की अब भारत में कहीं पर भी किसान के द्वारा अपनी फसल बेची जा सकती है किसान अपनी फसल किसी भी राज्य में बैच सकते हैं।

2 दूसरा बिल :The farmer (empowerment and protection agreement on price assurance and farm services ordinance 2020) यह बिल कहता है की प्राइवेट मंडी की स्थापना होगी। जिससे किसान अपना अनाज सीधे कारोबारियों को बेच सकता है बीच की एपीएमसी कृषि मंडी में खरीद नहीं होगी और किसानों को सीधे कारोबारियों एग्रीमेंट करना होगा।

3 तीसरा बिल: (The essential commodities amendment ordinance 2020)
इस बिल में किसान चाहे जितना अनाज जमा कर कर रख सकता है, और जब बाजार में मुकाबला बड़े तो सही कीमत मैं उन्हें बैच सकता है, माना जा रहा है कि इस प्रोविजन से किसानों को बाजार में सही कीमत मिलेगी।

क्यों कर रहे हैं किसान इसका विरोध?

  • सरकार कंपनी का साथ दे रही है..
  • किसान को एमएसपी को हाट ने का डर…
  • मंडियों का बंद होने का डर….
  • जमाखोरी का डर….
  1. सरकार कॉर्पोरेट कंपनी का साथ दे रही है ।
    किसान को डर है कि मंडी व्यवस्था खत्म होने के बाद कृषि क्षेत्र भी कोऑपरेटिव कंपनी के पास चला जाएगा और किसानों का नुकसान होगा किसानों को डर है, कि कंपनीज उनसे एमएसपी प्राइस से कम में अनाज खरीदेगी. किसानों का सरकार से कहना है कि सरकार सुनिश्चित कर दे की फसल एमएसपी प्राइस से कम में ना बीके।
  1. किसानों को है एमएसपी का खत्म होने का डर।
    नए कानून के अनुसार किसान अपना अनाज कहीं भी बैच सकता है। किसानों के लिए मंडी के बाहर कारोबार का रास्ता भी खोला गया है, पर किसानों को डर है कि सरकार एमएसपी को खत्म कर सकती है एमएसपी वाह मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है, केंद्र सरकार का कहना है कि एमएसपी खत्म नहीं होगी, लेकिन किसानों का कहना है कि कानून में शामिल हो की एमएसपी खत्म नहीं होगा।
  1. मंडियों के बंद होने का डर।
    किसानों को डर है कि मंडिया बंद हो जाएगी इसमें मंडियों के व्यापारी भी किसान का साथ दे रहे हैं किसानों का कहना है कि मंडिया बचेगी तभी तो अपना अनाज बेच पाएंगे 6 से 7 फीसद तक का टैक्स लगता है मंडी में जबकि बाहर कोई टैक्स नहीं लगता, तो फिर मंडी के व्यापारी बाहर से ही अनाज खरीदेंगे।इससे किसानों का नुकसान होगा किसानों की मांग है टैक्स व्यवस्था में सुधार हो।
  1. जमाखोरी का डर।
    किसानों को डर है कि न्यूनतम मूल्य में कोऑपरेटिव कंपनी किसानों से अनाज खरीदेगी ,और उन्हें जमा कर कर रखेगी, नई फसल आने पर किसानों से अनाज खरीदेगा कौन किसानों का इस पर भी कहना है कि जमाखोरी हटाने का भी कानून बनाए ।

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